विनती / Vinati

विनती


करता हूँ विनती अपने प्रभु से,

कहता हूँ यह सब से।

की अभी है राह लम्बी साँसे बचाये रखना,

दुर है मंजिल अपनी हौंसला बनाये रखना।

हो रहे हैं असफल अभी पर विश्वास जगाये रखना।

किस्मत भी साथ नहीं दया दिखाये रखना,

कांटे आ रहे हैं कई सुई मलहम तैय्यार रखना।

दर्द ही दर्द है करुणा बनाये रखना,

करना दुआ-प्रार्थना की सफल हो जाऊँ।

लक्ष्य ना सही उद्देश्य तो अपना पाऊँ,

राष्ट्र का ना सही गाँव का विकास मैं कर पाऊँ।

रिश्तेदार ना सही दोस्तों को साथ में पाऊँ।

करना इतना मेरे लिए मेरे प्रभु।

कि आशा का साथ होंसले से थामें रखुँ,

आलस और निराशा से दूरी बनाए रखुँ।

कर सकुँ सकारात्मक कार्य नकारात्मक ना बन पाऊँ,

करुँ पुजा अर्चना दया-प्रेम का ही गुण गाऊँ।

रखना हाथ सिर पर देना आशीर्वाद,

बनी रहे कृपा आपकी विनती है आपसे मेरे नाथ।

जय, जय, जय हो प्रभु आप।।


-कवितारानी।

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