बादलों की ओट से / badalo ki oat se
बादलों की ओट से हवायें तेज हुई, धुल भरी, चुभन भरी। दिख ना रहा रास्ता, ना कोई किरण भी। साफ आसमान ढक सा गया, भर ही गया। छुप गया सुरज, बादलों की ओट से।। एक मधुर मुस्कान सी, लकीरें नसीब सी। कुछ तेज लिये, आवेश लिये। सुहानी गुंबद सी, दिख रही तस्वीर सी। बादलों की ओट से, बादलों की ओट से।। संध्या की लाली में, गर्मी की चुभन से। राहत बनती पर्दे सी हवायें लिये नमी सी। ले जाती मेघों को, नजरों के हुलारे सी। मन को भाती किरणें, दिख रही बादलों की ओट से।। चुभन हुई कुछ ओट हटी, शर्म हुई सी नजर हटी। कुछ पल देख इधर, फिर से नजर वही डटी। मुस्कान मधुर वो आ रही, मन को भा रही। बादलों की ओट से, बादलों की ओट से।। अच्छा हुआ अकेला हूँ, मन से आह्लादित हूँ। जी रहा हूँ बस अभी, देख रहा हूँ सभी। वो आशाओं की जमीन, वो उम्मीद की लकीर। आ रही है जो, बादलों की ओट से।। हवायें जाये, हो जाये शाँत सब। आब छा जाये घटायें, हो जाये अँधेरा अब। ढल रहा रवि भी, भर गया रवि भी। जो देखी मधुर शाम, बादलों की ओट से। बादलों की ओट से।। -कवितारानी।