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Dreaming

 Dreaming Shining in the darkest sky, Hiding in the sunny day. Running in the worst way, Dreaming to be alive. One day will come, One ray will shine,  One way will fine,  Dreaming in my crying. Eyes, filling with salty water. Cheeks, wetting by malty weather, Lips, trembling with cracky gather, Dreaming for all these change. One day lips corner will run, One day Eyes will shine, One day cheeks will be mine. Dreaming all about happiness. Coying heart says, Lot's of things with rays, Hiding oneself to be cried. Dreaming to come out. One day must come for me, One day will live on me, One day no desired heart live, Dreaming for that, Dreaming for that, Dreaming for all about, My happy life, Dreaming. -kavitarani1

My Aim

 My Aim A desired Heart in me, Thinking always for dreams. A love desire hurts me. Wishing always for mean. My aim on the way. Stoping to distrack, My love has lost. Searching to be cream. I wish to be happy, Wishing to shine. My aim on the way. Way of all suffer. My aim on the ray. Hoping to be gain. I have begun life, With leaving you on way. My aim on the way, My life suffocated, On your gay, My aim on way. -kavitarani1

जीवन यही तो जीना होगा / jivan yahi to jeena hoga

  जीवन यही तो जीना होगा हो घने बादल छाये। बिजलिया कङके और डराये। आँसुओं की धार निरंतर बहे। लब सुखे रहे अनकहे। मन में घुटन, चिखे दवायें। इच्छायें चाहे अंदर ही मर जाये। कङवा हो घूट वीना ही होगा। जीवन है यही तो जीना होगा।। साथ रहे लोग या छोङ जाये। चले राह पर या गीर जाये। दीवारों सी बन बाधायें आये। पथ पर काँटों की सेज सज जाये। बढ़े आगे लोग पिछे खिंचे जाये। जोर आजमाईशें करते रहना होगा। जीवन यही तो जीना होगा।। आज की चोटे कल तक सताये। कल के घाव नासुर बन जाये। किलों से शब्द मन घायल कर जाये। बिते लम्हें यादों को जलाये। मन के बसे मन को बसाये। दुर्गंध सी तन मन को घुटन कराये। साँसों के सार ही तब रहना होगा। जीवन यही तो जीना होगा।। मटमैले नये परिधान हो जाये। नहाये कई महिनें बीत जाये। पीने को अशुध्द जल पाये। खाने को बासी रोटी चलाये। पल-पल कर लम्हें गुजारे जाये। घङियों के घङे घङते जाये। जीवन को निराधार तो धार में बहना होगा। जीवन यही तो जीना होगा।। बेसुध सुझ खोई रहे। आँखों के तारे एकटक रहे। कानों को प्रिय ना शब्द कोई। स्वाद रस नीरस हर कोई। नींद औझल हो फिर भी सोना होगा। जीवन यही तो जीना होगा।। अनिच्...

मैं हार नहीं मानूंगा / main har nahi manunga

  मैं हार नहीं मानूंगा हारा नहीं हूँ, ना हारुँगा मैं। जीवन पथ-पर चलता जाऊँगा मैं। हो बाधायें पहाङ बनी। जीवन डगर हो मुश्किलों भरी। खुद का सहारा बनुँगा मैं। हार नहीं मानुँगा मैं।। आये-जाये खुब सताये। लङे झगङे आग लगाये। बाधायें बन लकिरें स्थाई हो। जीवन में हर पल मुश्किल हो। हर बाधा को पार जाऊँगा मैं। हार नहीं मानुँगा मैं।। मन को मार-मार रहना हो। तन पर मार भारी हो। छाले पङे तलवे लहुलुहान हो। हाथों को लकवा पङा हो। जीवन सार नहीं हारुँगा मैं। हार नहीं मानुँगा मैं।। प्रिय-प्रियतमा प्रफुल्लित हो। छोङ मुझे लाभान्वित हो। जले-बुझे लाभान्वित हो। आँखों से नीत झरने बह जाये। सब बाधाओं को पी जाऊँगा मैं। हार नहीं मानूँगा मैं।। साथ रहे जग छोङ जाये। पास खङे मुझसे लङ जाये। हर रिश्ता होङ लगाये। पास पङोस जले चिल्लाये। सबकी मार सहुँगा मैं। हार नहीं मानूँगा मैं।। है, जीवन यही तो सच है। है, सहना यही तो सच है। आशाओं के दीप बुझने ना दूँगा। जीऊँगा गिरुंगा पर बढुँगा मैं। हार नहीं मानुँगा मैं।। सफल रहूँ असफल रहूँ। जीवन डगर पर बढता रहूँ। कोसु किसी को कोसों दूर रहूँ। लङु भी तो प्यार करुँ। सबको अपना ही कहूँगा मैं। ...

मधुर है शाम / madhur hai sham

  मधुर है शाम है सफर मधुर.... मधुर है मेरी शाम। आसमां है साफ और साँस है साथ। यही कहानी कह रही है जिन्दगी आम। है जिन्दगी आम, है जिन्दगी आम।। भूला भटका राह पर, आ खङा हूँ फिर। आकर राह पर, आ लङा हूँ फिर। फिर से हो रही है, नयी-नयी शुरुवात। कल के घाव भूल रहा, कर रहा याद। कर रहा याद... कर रहा याद।। है यादों में बचपन... बचपन की है याद। याद है मुझे के क्या थी बात। फिर से वही गलियाँ, वही रेगरलियाँ। वही दिख रहा दुखों में दबा है जो पहाङ। दुखों का पहाङ... दुखों का पहाङ।। हो आज मधुर... मधुर हो मेरा आज। कोशिशों के ज्वार में बह रहा आज। हो रही हैं आजमाई हो ख्वाहिशें आज। सपनों के सेज पर, सेज है आज।। है सफर मधुर... मधुर है मेरी शाम। आसमां है खुला... खुला है लिबाज। बंदिशें खत्म है... है खत्म मेरी चाह। है उङने की चाह... है उङने की चाह।। है जिन्दगी मधुर... मधुर है शाम। है चाहत मधुर... मधुर है शाम। देख रहा ढलता सुरज ढल रहा आज। है मधुर शाम मेरी मधुर है रात। है मधुर शाम मेरी मधुर है शाम। मधुर है शाम।। -कवितारानी।

जीवन सफर चलता जाऊँ / jivan safar chalta jau main

  जीवन सफर चलता जाऊँ नित आशाओं के दीप जलाऊँ, हर पल धुन कोई गुनगुनाऊँ। सबके मन को हरता जाऊँ, मैं प्रगति पथ स्वर्णिम बनाऊँ।। भुले-बिसरे भुलता जाऊँ, हर दिन नये रिश्ते बनाऊँ। सबके मन को खिलखिलाऊँ, मैं जीवन सफर में मुस्कुराऊँ।। घायलों की सेवा करता जाऊँ, घायल करें उसे माफी दिलाऊँ। भटकों की राह बनता जाऊँ, मैं हर दिन नये बंधंन बनाऊँ।। कल की किताबें भूल जाऊँ, रोज नये पन्ने लिखता जाऊँ। हर कहानी का किरदार बन जाऊँ, मैं अपनी धुन अपना गीत बन जाऊँ।। अपने परिधान प्रधान करुँ, अपनी जमीन को स्वर्ग करुँ। मन को रोज राजी करता जाऊँ, मैं जीवन डगर फुल सजाऊँ।। द्वेष-क्लेश पास आने ना दूँ, ईर्ष्या कपट दूर भगाऊँ। मिलन-सार चरित्र पाऊँ, मैं आजीवन परोपकार बन जाऊँ।। -कवितारानी।

मेरे बिना / mere bina

 मेरे बिना सपने होंगे, सहजादे होंगे। अपने होंगे, दिलवाले होंगे। घर होगा, घरवाले होंगे। खुशियाँ भी आयेंगी आँगन को। लोग पुछेंगे हाल को। सब जीवन जैसा होगा। बस मेरे बिना होगा।। तू खैलेगी, भी लङेगी भी। हॅसेगी भी, रुठेगी भी। मनायेगी भी, पुछेगी भी। बतायेगी भी। जीवन का हर रंग होगा तेरे साथ। बस तेरे साथ।। शादियों में, डिनर में। पार्टियों में, श्रृंगार होगा। अदायें होगी, रंग होगा। चेहरा खिलेगा भी। मस्ती होगी भी। सब होंगे तेरे आस-पास। बस मेरे बिना।। नजरें होगी, नजारे होंगे। बातें होगी, बहाने होंगे। सब सुहाना होगा। सब दीवाना होगा। अपनी ही लगने वाली दुनिया होगी। बस मेरे बिना।। लौट आने को जी भी करे। मचले चाहे आहे भरे। आँसुओं की धार रुके ना। दिल किसी की सुने ना। तो भी रहना होगी। सब कुछ सहना होगा। मेरे बिना।। लोग समझाने आयेंगे। तर्क-वितर्क कर तोलते जायेंगे। समझ आ जायेगी कई बार। समझ नहीं आयेगी कई बार। तब भी समझना होगा। मेरे बिना।। वो बारिस भी होगी। वो नहाना भी होगा। भीगना-भीगाना, चिल्लाना भी होगा। थोङी सी याद आयेगी भी। आँखें भीग जायेगी भी। पर हॅसी मैं उसे भुलाना होगा। मेरे बिना।। अब साथ कोई, कंधा क...

आदिवासी / aadivasi

  आदिवासी जन, जल जंगल, जमीन के रखवाले। हम आदिवासी प्रकृति के रखवाले।। अपनी जान तक लगा देते हैं, प्रकृति को सब न्योछावर करते हैं। हम वन के वासी हलवाले, जन, जल, जंगल, जमीन के रखवाले हैं।। आधुनिकता के परिचारक, चालक हम देश के रखवाले। जीव हित, परम्पराओं के ग्वाले, हम जंगल जमीन के रखवाले।। ना बैर किसी से, ना बैरी सहते हैं। हम मरते दम तक लङते हैं। हमारी बोली, संस्कृति अनमोल, हम इसे संजोये हैं। नव परिवर्तन की लहर में हम नहीं खोये हैं।। पढ़ लिख कर हमनें समाज को जाना है। अपने वजुद को दुनिया के सामने रख पर्यावरण संरक्षण क्या है बताया है। जो अनुसरण करें हमें तो प्रदुषण मुक्त धरती कर दें। हम आधुनिकता के साथ जीव जगत खुशहाल कर दें।। मान्यताओं से बंधे हम, सुधार को गले लगाते आये हैं। भारत के हम मुल निवासी बस सहते और सिखते आये हैं। अपने हक को छिनना आता, पर ना बैर फिर भी किसी से करते हैं। जन, जल, जंगल, जमीन के रखवाले, हम सम्मान से जीते हैं।। आदिकाल से जुङे, कई युगों को पाला है। तीर-धनुष-कमान संभाल कितनों को धो डाला है। रण बांकुरे हमें पुजते, वीरता के पर्यायी हम आज भी। जन, जल, जंगल, जमीन को सुरक्षा दे...

अब मन नहीं करता-2 /Ab man nahi karta

अब मन नहीं करता-2 अब मन नहीं करता। कि देखुँ तुझे जी भर के। सोंचु तुझे बिन सोंचे। बात करुँ दो ही भले। अब मन नहीं करता।। परायी लगती हो। बङी भद्दी दिखती हो। घीन भी आती है कुछ सोंच के। दुख भी होता है तुझे देख के। सब अब नया और बदला है। बस तुझसे मन बिझङा है। सामने आके खङी हो जाओ भले। बोलते-बोलते थक जाओ भले। नजरे तुझ पर टिकती नहीं। कार्नो पर झुँ रेंगती नहीं। अब कुछ मेरा दिखता नहीं। अब मन तुझपे करता नहीं।। अब मन नहीं करता। अब मन नहीं करता। कि खोजूँ तुझे झुपके-झुपके। कि सुनु तुझे बहाने से। मिलने का कोई सवाल नहीं। तेरे ना होने पर बवाल नहीं। अब साँसे एक लय तुझ बिन। अब तु मन को हरता नहीं। अब तेरे संग रहने का मन करता नहीं। अब मन नहीं करता। अब मन नहीं करता।। -कवितारानी।

जैसे तैसे / jaise taise

 जैसे तैसे जैसे-तैसे दिन बित गये। घर में उलझे सब बीत गये।। ना यादों की टिस रही। ना कोई बात विशेष रही।। ऐसे कैसे ही सब बीत गये। कहीं घुमें नहीं पर दिन बीत गये।। आती जाती यादों ने सताया था। रोज सुबह का चेहरा याद आया था।। उठते ही पानी दीवारों पर करना। याद रहा मकान का बनना।। जैसे-तैसे काम करता रहा। आहे भर लङ-लङ रहता रहा।। ना मिलना रिश्तों से ज्यादा हुआ। ना कोई मनका पास हुआ।। देख मनके के मजे दर्द हुआ। पर आते-जाते लोग हम दर्द हुआ।। ऐसे वैसे मस्ती भी की। बस एक महीना बीता अब याद ही।। जाना है कल चला जाता हूँ। याद रहे या ना रहे मैं भूल जाता हूँ।। पुरानों को भुल नयों को अपनाना है। कहीं मन लगाने का कोई बहाना है।। आती जाती किस्मत खराब रही। कुछ मन की दबी मन में रही।। अब सब बस सवाल है। अपने कहने वाले ही खराब है।। जैसे-तैसे ये साल और निकालुँ मैं। अपनी दुनियाँ बसाऊँ जी लुँ मैं।। जी लूँ मैं।। -कवितारानी।