भारत माता जननी है / bharat mata janani hai
भारत माता जननी है
धधक-धधक जल रही अग्नि अवनि है।
गौरवशाली भूमि ये भारत माता जननी है।
करनी अपनी इस धरा को हर युग भरनी है।
विश्व विधाता ज्ञान दाता भारत माता जननी है।
अग्नि ज्वाला ज्योति हर कोने जग उतरनी है।
ज्ञान सागर भारत भूमि हँस वाहिनी है।
रस अमृत प्रेम, पताका शाँति की स्त्रोत स्विनि है।
श्री शिरोधरा अमृतसार सी भारत माता तरंगिणी है।
विधु वैभव निशा छाकर बढ़ती रहनी ही रहनी है।
गौरवशाली भारत भूमि ज्ञान की जननी है।
तमस् वयस् बहत् घटत बढ़ती जो वहनि है।
ओज रोष हटत् रहत जो ज्वाला बननी जननी है।
गौरवशाली भारत भूमि जल रही अ्ग्नि अवनि है।
भारत माता भाग्य विधाता भारत भूमि जननी है।।
-कवितारानी।
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