मैं जिन्दा हूँ / main zinda hun

मैं जिन्दा हूँ


अब आशाऐं भी क्या।

जो तू नहीं साथ।

अब सपने भी क्या।

जो तू नहीं साथ।

 अब वजूद ही क्या।

जो तू नहीं पास।

अब अपना भी कौन।

जो तू नहीं साथ।

अब रंग भी क्या।

जो नहीं कोई पास।

तेरा तुझसे जो बिछङा है।

ये रवि बेरंग है।

सात रंग छुपाये भी।

पर धुप जलाये भी।

साज नहीं सुर नहीं।

जो गुण गान तेरा नहीं।

अब बातों का रस खोया है।

तेरा मैं जो जुदा है।

अब कोई उम्मीद नहीं।

जो पास तू नहीं।

अब कोई इच्छा नहीं।

जो तू साथ नहीं।

कौन अब मन भाये।

जो तु छोङ ना जाये।

खुद से मैं अकेला हूँ।

जब से तुझसे बिछङा हूँ।

अपने आप में सिमटा हूँ।

जबसे तुझसे बिछङा हूँ।

खुद को व्यस्त रखता हूँ।

जबसे तुझसे दुर हूँ।

अब मैं बस जिन्दा हूँ।

कुछ शर्मिंदा हूँ।

आशाओं की खोज है।

अब नीरस सब ओज है।

अब बस साँसे है।

और मैं जिन्दा हूँ।।


-कवितारानी।

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