हॅसो की कहानी / hanso ki kahani
हॅसो की कहानी
दो हंसो का जोङा होता, होता दोनो का मन मैल।
एक जीये तो दुजा, नहीं बिन दूजे जीवन रैन।
कमी आज तुम्हारी हुई, तुम बिन ना जीवन रैल।
पूर्ण अंग होती तुम, होती फिर अर्ध्दांगिनी।
तरक्की के पिछे होती, होती वैभव की रानी।
तुमसे घर मंदिर होता, मुझसे होती सेज।
मैं दिया होता हार का, होती तुम रोशन चहूँ ओर।
मैं कर्म करता बाहर, तुम नैतिकता लाती धर्म संग।
नारी घर का चिराग होती नर उसमें तेल।
रोशन होता घर जब मिला करते दोनों मैल।
जब तक ना होता सच्चा मैल बनता है बेमैल।
आज अ्धुरे हैं पर चाहे मन का सच्चा मैल।
डुँडते हैं सर्वगुण सम्पन्न तुझको ऐ नारी।
जिससे बन सके हम भी नर-नारी।
सप्त-चक्र, सप्त व्युह से बन जाए हम साथी और राही।
के बन एक चल चले बन पटरी और रैलगाङी।
तुम मुझे राह दिखाओ और में संग तेरे बनुँ संग तेरे राही।
आओ मैल रचाएँ, रचाएँ एक संसार।
सच करले सपने बन कर हम सरकार ही।
आओ बन जाए दो हंसो का जोङा जैसे, होता प्रेम अनमोल जिनमें।
एक जीये तो दुजा, ना बिन दुजे जीवन ना रैन।
-कवितारानी।
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