समय गुजार रहें है / samay gujar rhe hai

समय गुजार रहें है


सपनों की जिंदगी जी रहे हैं।

हाँ जो देखा था ख्वाब वही जी रहे हैं।

जी नौकरी कर रहे हैं।

या कहे समय गुजार रहे हैं।।


सोंचा था ख्वाब हसीन होगा।

मिलेगी नौकरी ते सब कुछ अच्छा होगा।

जी सैलेरी आती है।

या कहे जरुरतें पुरी हो जाती है।।


ज्यादा लोड नहीं इतना भी।

काम के बदले दाम जो मिलता है।

जी हाँ काम पर काम ही मिलता है।

या यूँ कहे एक का सुकून सा नहीं मिलता है।।


अपना काम ही करते हैं।

नहीं अपना और नाकारों का काम भी करते हैं।

जी ईमानदारी जिंदा है यहाँ।

या यूँ कहे ईमानदारी तो है ही ईमानदारों के लिए।।


बेइमानों की मौज कहें।

आलसियों की तो आराम कहे।

जी यही तो बस रह गया है।

लुटो जिसे लुटना है।।


मैं भी समय पर जाता हूँ।

काम करता हूँ और कमाता हूँ।

भेदभाव सहते भर गया हूँ।

या कहूँ अब बस समय गुजार रहा हूँ।।


विरोधी नकारात्मकता-भेदभाव का किया है।

संघर्ष और धामें सहे है।

अलगाव और बुराई को पाया हूँ।

ईमानदारी कर्मठ अकेला रहा गया हूँ।।


मन से मजबुत हूँ काम करता हूँ।

कर्मठता सहनशीलता दिखलाता हूँ।

मजबुर हूँ काम-वेतन पाने को।

इसीलिए टिक कर समय गुजार रहा हूँ।।


देशहित जैसी बात नहीं आती अब।

कुछ नया करने की जिद नहीं होती अब।

अब बस आदेशों की पालना करते हैं।

सुबह जाते हैं शाम तक समय पुरा करते हैं।।


यूँ कहे खो गये हैं, भेङियों में रह।

निस्तेज हो गये नाकारों-बेईमानों में रह।

सिख गये सरकारी काम को हम भी।

कैसे गुजारते समय, सिख गये हम भी।।


-कवितारानी। 

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