तुम्हें भुलायें कैसे / tumhe bhulaye kaise

 तुम्हें भुलायें कैसे


बिखरते सपने संजोये कैसे, तेरी याद को मिटाये कैसे।

सपने दिखा गये हो आप, इन्हें हकीकत बनाये कैसे।

नूर भरे चेहरे कई देखे थे, हुस्न के खजाने कई देखे थे।

पर जो चाहत देखी है आपकी आँखों में उन्हें भुलाये कैसे।

पहली नजर रही और पहला प्यार हुआ इसे जताएँ कैसे।

पहली एक रात हसीन निकल गई आप अपने घर गई।

पर दे गई दर्द कई उन्हें जहन से अपनी मिटाए कैसे।

अब तक करते थे नयनों की चोरी हुई ना हुई थी दिल की चोरी।

नैनों से हुआ जब मिलने की आस है और बस प्यार है बस प्यार है।

इस प्यार को परवान चढ़ाये कैसे आपको अपना बनाये कैसे।

कहीं कोई धोखा तो नहीं हुआ मन यूँ ही गुम तो नहीं हुआ।

यूँ ही न तङपते रह जाएँ कहीं पटरी से गाङी उतर ना जाए कहीं।

कैसे हाल अपना सुनाएँ आपको कैसे अधुरी कहानी बताएँ आपको।

हाल बैहाल हुआ है अब इसे सही हाल लाए कैसे।

सपने जो पल भर में संजोए है पुरे उन्हें बनाए कैसे।

बिखरते सपने संजोए कैसे, तेरी याद को मिटाए कैसे।

तेरी याद को मिटाए कैसे।।


-कवितारानी।

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