प्रेमिका के नाम / premika ke naam

 प्रेमिका के नाम


एक पन्ना प्रेमिका के नाम करता हूँ।

कैसी होगी वो, कैसी मैं चाहूँ उसे यह बयां करता हूँ।

अपने मन के भेद आज स्याही कलम करता हूँ।

तारिफ में उसकी इतनी करुँ कि खुबसुरती उसकी नयनों से हो।

बनावट उसकी संगेमरमर सी हो,

खुदा भी देख श्रृंगार उसका रुक ना सके कहे क्या खुब हो।

होंठ उसके गुलाब की पंखुङियों से भी नाजुक हो।

लाली उसके गालों की आँखों में चमक बङाती हो।

गोरा बदन उसका चमके धुप सा छाया में भी।

कैश काले घनघोर अमावस्या की रात हो।

बिंदिया माथे पर साँझ का सुरज हो।

चेहरा उसका हुस्न मल्लिका परियों सा हो।

देख जिसे नजर हटी ना पाये।

देख उसके उरोंजों को नारी भी सरमाये।

मदमस्त बदन उसका सबको ललचाये।

नासिका उसकी अपसरा को भी लजाये।

नथ उसपे चार चाँद और बढ़ाये।

देख चेहरा उसका रोक ना कोई मन को पाए।

ऐसी नवयुवती मेरे मन की प्रेमिका बन जाए।

बखान करते खुबसुरती का उसके कलम मेरी रुक ना पाये।

गुणों की चर्चा में आगे बढ़ जाए।।


-कवितारानी।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

झुठी यारियाँ | Jhuthi yariyan

नव वर्ष- उमंग मिले / Nav varsh- umang mile

मैं राही बन चलता हूँ | Main Rahi Ban Chalta hun