श्याम नाम रंग / shyam naam rang

 श्याम नाम रंग


श्याम नाम रंग ले, हम श्याम नाम रंग ले।

श्याम की है जो सच्चाई नाम नाम है वो पाई।

जो सच है वो श्याम जो रत है वही नाम।

जो कर्मठ ज्ञानी सा फिरे पर जिसमें नहीं राम है।

जो ज्ञान, दान की बैत करें पर जिसमें नहीं राम है।

जो ढोंग करे पाखण्ड करे दुनिया में बस अपनी झोली उसमें कहाँ राम है।

वो अधुरा अज्ञानी है उसका नहीं उध्दार है।

श्याम नाम रंग ले, हम श्याम नाम रंग।

बैठा जो अकर्मठ बन के, लिए जो राम का नाम है।

करता निर्मल मन, कर्म से सेवा जो दिन रात है उसमें राम नाम है।

होता जो ज्ञानी करता बात धर्म सर्वहित कि जो, होता वो राम प्रिय वो।

जो पुण्य काम कर, राम नाम कर रहता इस लोक में।

जो कर्म करे सत्कर्म करे जो राम नाम दिन रात करें।

सुनते प्रभु उनकी ही जो होते राम प्रिय वो होता उनका उध्दार यहाँ।

श्याम नाम रंग ले हम श्याम नाम रंग ले।

उसपे जो विश्वास है जो जग पार वो लगवायेंगे।

जो रंगा श्याम रंग में हो तो उध्दार वो उसका कर पोयेंगे।

जो करता सत्कर्म यहाँ होता कर्मठ भक्त जो राम का।

होता नाम जग में और पाता पावन रंग श्याम का।

रंगा हुआ है जो श्याम वही पार पायेगा दुख, दर्द, दुनिया वही सह पायेगा।

श्याम नाम रंग ले श्याम नाम रंग।।


-कवितारानी।

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