मैं हार नहीं मानूंगा / main har nahi manunga
मैं हार नहीं मानूंगा
हारा नहीं हूँ, ना हारुँगा मैं।
जीवन पथ-पर चलता जाऊँगा मैं।
हो बाधायें पहाङ बनी।
जीवन डगर हो मुश्किलों भरी।
खुद का सहारा बनुँगा मैं।
हार नहीं मानुँगा मैं।।
आये-जाये खुब सताये।
लङे झगङे आग लगाये।
बाधायें बन लकिरें स्थाई हो।
जीवन में हर पल मुश्किल हो।
हर बाधा को पार जाऊँगा मैं।
हार नहीं मानुँगा मैं।।
मन को मार-मार रहना हो।
तन पर मार भारी हो।
छाले पङे तलवे लहुलुहान हो।
हाथों को लकवा पङा हो।
जीवन सार नहीं हारुँगा मैं।
हार नहीं मानुँगा मैं।।
प्रिय-प्रियतमा प्रफुल्लित हो।
छोङ मुझे लाभान्वित हो।
जले-बुझे लाभान्वित हो।
आँखों से नीत झरने बह जाये।
सब बाधाओं को पी जाऊँगा मैं।
हार नहीं मानूँगा मैं।।
साथ रहे जग छोङ जाये।
पास खङे मुझसे लङ जाये।
हर रिश्ता होङ लगाये।
पास पङोस जले चिल्लाये।
सबकी मार सहुँगा मैं।
हार नहीं मानूँगा मैं।।
है, जीवन यही तो सच है।
है, सहना यही तो सच है।
आशाओं के दीप बुझने ना दूँगा।
जीऊँगा गिरुंगा पर बढुँगा मैं।
हार नहीं मानुँगा मैं।।
सफल रहूँ असफल रहूँ।
जीवन डगर पर बढता रहूँ।
कोसु किसी को कोसों दूर रहूँ।
लङु भी तो प्यार करुँ।
सबको अपना ही कहूँगा मैं।
हार नहीं मानूँगा मैं।।
हो अंत आज तो संतुष्ट।
जो भ्रांति आज तो तुष्ट।
नहीं किसी से रुष्ट।
आज भी रहना चाहूँ पुष्ट।
यहीं दुआ माँगुगा मैं।
हार नहीं मानूँगा मैं।
हार नहीं मानूँगा मैं।।
-कवितारानी।
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