अब मन नहीं करता-2 /Ab man nahi karta

अब मन नहीं करता-2


अब मन नहीं करता।

कि देखुँ तुझे जी भर के।

सोंचु तुझे बिन सोंचे।

बात करुँ दो ही भले।

अब मन नहीं करता।।


परायी लगती हो।

बङी भद्दी दिखती हो।

घीन भी आती है कुछ सोंच के।

दुख भी होता है तुझे देख के।

सब अब नया और बदला है।

बस तुझसे मन बिझङा है।

सामने आके खङी हो जाओ भले।

बोलते-बोलते थक जाओ भले।

नजरे तुझ पर टिकती नहीं।

कार्नो पर झुँ रेंगती नहीं।

अब कुछ मेरा दिखता नहीं।

अब मन तुझपे करता नहीं।।


अब मन नहीं करता।

अब मन नहीं करता।

कि खोजूँ तुझे झुपके-झुपके।

कि सुनु तुझे बहाने से।

मिलने का कोई सवाल नहीं।

तेरे ना होने पर बवाल नहीं।

अब साँसे एक लय तुझ बिन।

अब तु मन को हरता नहीं।

अब तेरे संग रहने का मन करता नहीं।

अब मन नहीं करता।

अब मन नहीं करता।।


-कवितारानी।

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