जीवन सफर चलता जाऊँ / jivan safar chalta jau main
जीवन सफर चलता जाऊँ
नित आशाओं के दीप जलाऊँ, हर पल धुन कोई गुनगुनाऊँ।
सबके मन को हरता जाऊँ, मैं प्रगति पथ स्वर्णिम बनाऊँ।।
भुले-बिसरे भुलता जाऊँ, हर दिन नये रिश्ते बनाऊँ।
सबके मन को खिलखिलाऊँ, मैं जीवन सफर में मुस्कुराऊँ।।
घायलों की सेवा करता जाऊँ, घायल करें उसे माफी दिलाऊँ।
भटकों की राह बनता जाऊँ, मैं हर दिन नये बंधंन बनाऊँ।।
कल की किताबें भूल जाऊँ, रोज नये पन्ने लिखता जाऊँ।
हर कहानी का किरदार बन जाऊँ, मैं अपनी धुन अपना गीत बन जाऊँ।।
अपने परिधान प्रधान करुँ, अपनी जमीन को स्वर्ग करुँ।
मन को रोज राजी करता जाऊँ, मैं जीवन डगर फुल सजाऊँ।।
द्वेष-क्लेश पास आने ना दूँ, ईर्ष्या कपट दूर भगाऊँ।
मिलन-सार चरित्र पाऊँ, मैं आजीवन परोपकार बन जाऊँ।।
-कवितारानी।
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