मधुर है शाम / madhur hai sham

 मधुर है शाम


है सफर मधुर.... मधुर है मेरी शाम।

आसमां है साफ और साँस है साथ।

यही कहानी कह रही है जिन्दगी आम।

है जिन्दगी आम, है जिन्दगी आम।।


भूला भटका राह पर, आ खङा हूँ फिर।

आकर राह पर, आ लङा हूँ फिर।

फिर से हो रही है, नयी-नयी शुरुवात।

कल के घाव भूल रहा, कर रहा याद।

कर रहा याद... कर रहा याद।।


है यादों में बचपन... बचपन की है याद।

याद है मुझे के क्या थी बात।

फिर से वही गलियाँ, वही रेगरलियाँ।

वही दिख रहा दुखों में दबा है जो पहाङ।

दुखों का पहाङ... दुखों का पहाङ।।


हो आज मधुर... मधुर हो मेरा आज।

कोशिशों के ज्वार में बह रहा आज।

हो रही हैं आजमाई हो ख्वाहिशें आज।

सपनों के सेज पर, सेज है आज।।


है सफर मधुर... मधुर है मेरी शाम।

आसमां है खुला... खुला है लिबाज।

बंदिशें खत्म है... है खत्म मेरी चाह।

है उङने की चाह... है उङने की चाह।।


है जिन्दगी मधुर... मधुर है शाम।

है चाहत मधुर... मधुर है शाम।

देख रहा ढलता सुरज ढल रहा आज।

है मधुर शाम मेरी मधुर है रात।

है मधुर शाम मेरी मधुर है शाम।

मधुर है शाम।।


-कवितारानी।

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