आगे-आगे देख होता है क्या / AAGE DEKH HOTA HAI KYA

 आगे-आगे देख होता है क्या


हो गई सुबह अब जग तू जा।

देख सूरज ने भी दिखाया है तेवर आ।

भूल रात अंधेरा अब, सवेरा जग जा।

हो गई खता अब जाने दे जा।

आगे-आगे देख होता है क्या।।


नम आँखे होगी, बातें होगी, मुलाकातें होगी।

देख तुझे साँसे कभी आधी-आधी होगी।

रोती रहेगी तन्हाई भीङ में मुस्कान।

होना है जो होता है तू भी भूल जा।

आगे-आगे देख होता है क्या।।


आँखो पर काजल होंठो पर हो लाली।

खाली थी गोद अब बैठी होगी लाली।

काली-काली परछाई बतायेगी दर्द है क्या।

नकली सी मुस्कान सुनायेगी टिस है क्या।

परवाह जो की तो तेरी भी होगी खता।

आगे-आगे देख होता है क्या।।


खता हूई थी, बेरहमी हूई थी, सताया था कितना।

भाव खाये थे, रोज रुलाये थे, अब दूर ही जा।

आने ना दे, ना सुनना कह ना ना।

जो हो रहा उसकी कमी है वो वही वजह।

आगे-आगे देख अब होता है क्या।

आगे-आगे देख अब होता है क्या।।


-कवितारानी।

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