जोर आजमाईशें / Jor aajmaishen
जोर आजमाईशें
कुछ सीले हुए हैं, पर अब कपङे नये है।
खुद निर्णय लेता हूँ, सपने मैं संजोता हूँ।
आजमाइशें खुब हैं, तकदीर में दरारें बहुत हैं।
रोक लेता खुद हूँ को, आँसुओं की धार है।
जीवन मझधार है, क्या ही कमाया मैंने है।
क्या खोया है, पास नहीं कुछ भी।
बस सपनों को पिरोया है, जोर आजमाइशें बहुत है।
क्या मुझको लेना है, अपनी मिट्टी में दफन होना है।
क्या किसी को देना है, क्या ही किसी से लेना है।।
कहता जमाना मुझसे, कहता अपनी बातें।
मैं मुरख मान जाता, कहता अपनी सुरत।
बदल गई है सुरत मेरी, नयन नक्षत्र भी बदले हैं।
जोर आजमाइशें जिन्दगी, क्या मुझको लेना है।
अपनी ही जमीन पर पङा, मैं अधूरा सा हूँ खङा।।
कोई मुझसा ना मिला, हूँ अकेला ही खङा।
जोर आजमाइशें बहुत, अँधेरा है घना।
शौर सब तरफ है अब, ्अब शौर मन का घट रहा।
किस घङी हो मरा, आज लुटा पङा।
जोर आजमाइशें बहूत, हाथ पैर मार रहा।
किसे कहूँ अपनी बात, अपनी बात पर अङा।।
चलने मैं देता नहीं, चलती नहीं मेरी कहीं।
आँख से जो गिरा, मोती ही था बना।
कसमकश है जिन्दगी, जिन्दगी है जुआ।
जोर आजमाइशें कई, कई दुखों से अङा।
कौन मेरा है यहाँ, कौन पराया है यहाँ।
कौन कहे अपना मन, जोर आजमाइशें कर रहा।।
सताता था वो, रुलाता था वो।
पीङा दिन-दिन रही, घङियाँ गीन-गीन रही।
चलती रही जिन्दगी, चलती रही जिन्दगी।
आज कहीं हूँ खङा, खुद ही से अङा।
जोर आजमाइशें कई, कई से मैं लङा।
किस कदर याद करुँ, भुला नहीं कुछ भी।
याद है दर्द भी, फिर भी जी रहा।
जी रहा जीवन यहाँ, जी रहा जीवन यहाँ।
जोर आजमाइशें कई, दर्द कई पी रहा।
कौन अपना है यहाँ, कौन पराया है यहाँ।
जोर आजमाइशें है, रोज अपनी कर रहा।
अपनी ही जमीन, अपना है आसमां।
जोर आजमाइशें जिन्दगी, जी रहा, मैं जी रहा।।
-कवितारानी।
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