शिक्षा खोई हुई / shiksha khoi hui

 शिक्षा खोई हुई


अहमी, दंभी, पांखडी ज्ञान भरे जो गुरु दिखते हैं।

अपनी होङ में, तेज गति से दौङते हैं।

इन आज के मास्टरों मे लगता है शिक्षा सोई हुई है।

हर दिन अपने आलाप में दिखते हैं, शिक्षा खोई हुई है।।


जो ज्ञान सागर पढ़े-सुने-देखे कहीं।

जो महानता का आवरण ओढ़ बैठे रहते कहीं।

आज के विध्यालयों में खोजता मे ज्ञानवान ही।

और लगता है सब नौकरी वाले, इनमें शिक्षा खोई हुई।।


शिक्षा का सार पता ना होता इनको।

ज्ञान का आधार पता ना होता है।

दुसरे प्रतिभावान को गिराना लक्ष्य इनका होता है।

लङने का ही इनके मन होता लगता है।।


मन के मारे, मन के हारे सारे ये।

अपनी छवि सुधारने को अभिनयी लगते ये।

इनको नहीं शिष्यों की पङी कहीं।

इनमें लगता है वास्तविक शिक्षा खोई हूई।।


भावी भाग्य के निर्माता सारे ये।

अपने आलाप गाते रहते है ये।

किसी की जो ना सुनने वाले है।

इनमें नैतिकता कहाँ हो सकती है।।


-कवितारानी।

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