वो दुल्हन / vo dulhan

 वो दुल्हन


अँखियन सुरमा, माथे बिंदिया, होंठो पे मुस्कान ले।

ओढ़ चली चुनरिया, बिटिया चली नये संसार में।।

मधुर मुस्कान, गालों पे लाली, चली छोङ अपने रिश्ते ये।

बिटिया रानी चली अपने नये संसार में।।

माँ का आँचल, वो आँगन, खैली थी जो बचपन से।

छोङ चली पिछे जैसे हो कोई ये याद रे।।

अँखियन सूरमा, माथे बिंदिया, होंठो पे मुस्कान ले।

ओढ़ चुनरिया माथे, बिटिया चली ससुराल में।।

कौन सा आँगन भाये, कौन दुलारे, कौन बुलाये प्यार से।

छोङ चली जो बिटिया अपने बाबुल का संसार रे।।

आँखों में पानी, गालों पर छिल-छिल निशान है।

ये बिछुङन की घङी बङी दुखदायी है।

माँ का आँचल याद करे, रोये-घबराये ये।

अपनी सारी यादों को समेट चली नये संसार वे।

रीत बुरी या प्रित बुरी गाये माँ-बाप ये।

सब छोङ जाना होता जीते जी ये कैसा माया जाल है।

अँखियन सूरमा, माथे बिंदिया लाल चुनरिया ओढ़ के।

 बिंटिया चली अपने नये संसार में।।


-कवितारानी।

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